Pateti Festival Essay in Hindi पतेती पर निबंध

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Pateti Festival Essay in Hindi पतेती पर निबंध

पतेती पारसी नववर्ष – भारत के कुछ राज्यों में पतेती के दिन छुट्टी होती है। पारसी समाज का भारत में आगमन कुछ ऐसे हुआ। दीव (गुजरात) के तट से समुन्द्र में एक गंभीर तूफ़ान सा सामना करते हुए कुछ लोगो का समुदाय छोटी नाव में गुजरात के संजान सूरत तट पर आए। हिंदुस्तान सौराष्ट्र के स्थानीय हिन्दू राजा जड़ी राणा से इन लोगो ने संपर्क किया। राज्य में शरण आने का अनुरोध इन लोगो ने जड़ी राणा जी से किआ। जड़ी राणा जी ने दूध का भरा हुआ प्याला इन शरणार्थियों को भेजा। भरे प्याले का मतलब राज्य में पहले से ही लोग भरे है और नए शरणार्थियों को जगह नहीं है। शरणार्थियों ने जवाब में बड़े हुशियारी से प्याले में कुछ शक्कर डालके वापिस किया। शक्कर डालने का मतलब था कि जो राज्य में जो लोग है उनमे घुल-मिलकर रहने कि तयारी उन लोगो ने दिखाई। शरणार्थियों का यह मीठा जवाब जड़ी राणा को पसंद आया पर उन्होंने कुछ शर्ते रख दी।

पहली शर्त थी कि उन्हें गुजराती भाषा अपनानी होगी। दूसरी शर्त कि उनकी महिलाओं को स्थानीय महिलाओं कि तरह वस्त्र (साडी) पहननी होगी। तीसरी शर्त कि वह कोई भी शस्त्र का उपयोग नहीं करेंगे। आखरी शर्त कि इन समुदायों में विवाह केवल शाम के समय ही किए जा सकेंगे। शरणार्थियों ने इन शर्तो को अपनाते हुए संजान शहर में सर्व प्रथम अपना डेरा डाला। इन समुदायों को पारसी समुदाय से जाना जाता है। पारसी समुदाय गुजरात, महाराष्ट्र एव उत्तरी भारत के कुछ राज्यों में है। भारत कि आज़ादी में इन पारसी समाज का भी अनमोल सहभाग था। बॉलीवुड के जाने माने कलाकार श्री बोमन ईरानी भी इसी समाज के है। पतेती पारसी समाज का नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर पारसी धर्मशाला में इकठे होकर पूजन करते है। मिठाई बांटकर खुशिया मनाई जाती है।

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