Essay on Chandigarh in Hindi चण्डीगढ़ पर निबंध

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Essay on Chandigarh in Hindi

शिवालिक नदी के तट पर बहुत वर्षों पहले एक मन्दिर था जो चण्डी देवी के मन्दिर के नाम से प्रसिद्ध था। इसके आस-पास ही पुराना चण्डीगढ़ स्थित है। आरम्भ में इस शहर के चारों ओर, आस-पास घने-घने हरे भरे जंगल थे। इन घने जंगलों में मनुष्य स्वतन्त्र रूप से निडर होकर नहीं घूम सकता था। क्योंकि यहां अनेक हिंसक जंगली जानवर घूमा करते थे। चण्डीदेवी के मन्दिर के नाम पर इसका नाम चण्डीगढ़ रखा गया है।

आधुनिक युग का भव्य नगर चण्डीगढ़ पुराना नगर नहीं है। इस नगर की नींव 7 अक्तूबर 1953 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने रखी थी।

इस नगर का कुल क्षेत्रफल लगभग 24 किलोमीटर है। इस नगर के चारों ओर की स्थिति में एक ओर तो ऊंची पहाड़ियां हैं और शेष तीनों ओर खुले हुए दूर-दूर तक फैले मैदान हैं। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला चण्डीगढ़ से केवल 96 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके दूसरी ओर अम्बाला है और अम्बाला शहर की इससे दूरी 48 किलोमीटर है। इसे सुन्दर शहर की पंजाब के औद्योगिक नगर लुधियाना से कुल दूरी 95 किलोमीटर है।

इस नगर की निर्माण योजना फ्रांस के एक प्रसिद्ध इंजीनियर श्री। एस डी कारबूजियर ने कठिन मेहनत करके तैयार की और यह नगर आज उनके परिश्रम तथा बुद्धि का प्रमाण देता है। प्रत्येक दृष्टि से पूर्ण आयताकार सैक्टरों में बंटा हुआ यह नगर भवन निर्माण कला के प्रति मानव की रुचि का साक्षी है। प्रत्येक सैक्टर में सभी प्रकार की आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, यथा-स्कूल, बाजार, डाकघर, डिस्पेंसरी, धार्मिक स्थल, चौड़ी-चौड़ी सुन्दर सड़कें और घास के हरे-भरे सुन्दर बड़े मैदान तथा खेल के मैदान। बाजार भी समुचित बड़े और व्यवस्थित हैं तथा प्रत्येक सैक्टर में स्थित बाजार सभी प्रकार की क्रय-विक्रय की वस्तुओं की दुकानों से युक्त हैं। दुकानों का आकार और व्यवस्था भी एक जैसी है। इनमें पार्किंग के लिए भी खुले स्थान हैं। प्रत्येक सैक्टर की निर्माण व्यवस्था में इस बात का भी खास ध्यान रखा गया है।

कुछ सैक्टर व्यापारिक उद्देश्य से और विभिन्न प्रकार के क्रय-विक्रय के केन्द्रों के लिए तथा कुछ सरकारी कार्यालयों के लिए ही विशिष्ट ढंग से निर्मित हैं। इन सैक्टरों में लोगों का निवास स्थान नहीं है। औद्योगिक दृष्टिकोण से भी एक अलग विशाल सैक्टर विकसित किया गया है जोकि शहर से काफी दूर बाहर की ओर स्थित है तथा शहर को प्रदूषण से बचाता है। सैक्टर-17 व्यापारिक गतिविधियों का केन्द्र तो है ही, और यहां पंजाब तथा केन्द्रीय सरकार के भी अनेक कार्यालय हैं। सैक्टर-14 शिक्षा संस्थाओं के लिए विशेष कर प्रसिद्ध है तथा यहां पंजाब विश्वविद्यालय स्थित है। पंजाब-विश्वविद्यालय के साथ ही पी. जी. आई. एवं इंजीनियरिंग कॉलेज भी स्थित है।

आधुनिक सभ्यता के प्रतीक इस नगर में मनोरंजन एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी पूरी व्यवस्था है। शहर में अनेक सिनेमा घर हैं जिनका निर्माण भी विशेष ढंग से किया गया है। सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए एक प्रसिद्ध थियेटर टैगोर थियेटर है जहां चण्डीगढ़ की अनेक सांस्कृतिक संस्थाएं तथा अन्य देश विदेश से आई हुई टीमें अपने भव्य सांस्कृतिक एवं संगीत कार्यक्रम तथा नृत्य एवं नाटक प्रस्तुत करती हैं। संध्या के समय प्रत्येक सैक्टर के पार्क बच्चों के कोलाहल से भर जाते हैं एवं वृद्धों के भ्रमण से महक उठते हैं। सभी लोग इन पार्को में टहलते और आनन्दित होते हैं। बाजारों में भीड़ तो प्रत्येक सैक्टर में होती है लेकिन सैक्टर17 तथा सैक्टर-22 की भीड़ का आनन्द अपनी ही तरह का दृश्य उपस्थित करता है।

चण्डीगढ़ आज भारत का ही नहीं बल्कि विश्व का चर्चित और सुन्दर नगर माना जाता है। इसकी चौड़ी-चौड़ी सड़कें सपाट और सुन्दर तो हैं ही, उनके दोनों ओर लगे सुन्दर वृक्षों की पंक्तियां और हरियाली की क्यारियां उन्हें और भी भव्यता प्रदान करती हैं। सुन्दर काली चौड़ी सड़कों पर यातायात का प्रवाह ‘प्रकाश विधि’ से नियन्त्रित होता है। दौड़ती बसें, कारें, स्कूटर आदि मन को मुग्ध करती हैं। फूलों की रंग-बिरंगी हंसती क्यारियां और लदे वृक्ष नयनभिराम दृश्य उपस्थित करते हैं। रोज गार्डन में खिलते मुस्कराते गुलाब की कई किस्में दर्शकों को मोहित करती हैं। चण्डीगढ़ का रॉक गार्डन आज भी दर्शकों और यात्रियों को हैरान कर देता है। रोज़ गार्डन में 20 मीटर की ऊंचाई तक उठता हुआ पानी का फव्वारा बच्चों और वृद्धों, युवाओं और युवतियों सभी को सम्मोहित करता है। सुखना झील की शाम मन और मस्तिष्क में प्यार की धुन छेड़ती है। इसमें नाव पर तैरते लोग प्रफुल्लित हो उठते है।

चण्डीगढ़ में स्थित अजायब घर सभी के लिए समान रूप से आकर्षण का कारण है। सैन्ट्रल स्टेट लाइब्रेरी, विधान सभा भवन, आर्ट गैलरी, हाइकोर्ट चण्डीगढ़ को रमणीयता एवं आकर्षण प्रदान करते हैं। सैक्टर-14 में पंजाब विश्वविद्यालय का विशाल परिसर शिक्षा की तपोभूमि तो है ही, यह युवक और युवतियों के फैशनेबल परिधानों, सुगंधित द्रव्यों की मादक सुगंध से भी सुरभित रहता है। यह विश्वविद्यालय देश के अनेक योग्य वैज्ञानिकों, डाक्टरों, इंजीनियरों, साहित्यकारों और कलाकारों को शिक्षित करने वाला विश्व-प्रसिद्ध विश्वविद्यालय है जिसमें विदेशों से भी शिक्षा ग्रहण करने के लिए विद्यार्थी आते हैं।

चण्डीगढ़ शहर आज फैशन, सौन्दर्य, सभ्यता और संस्कृति का अदभुत संगम बन गया है। उन्मुक्त वातावरण में इठलाता यौवन इस शहर को नया आयाम देता है। देश के अनेक भागों से बसे हुए लोग अनेक भाषाओं में बातचीत करते हुए यहां पर विशाल भारत का मानचित्र प्रस्तुत करते हैं।

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