ताजमहल पर निबंध Essay on Taj Mahal in Hindi

Essay on Taj Mahal in Hindi. ताजमहल पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 and 12 के बच्चों और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए ताजमहल पर निबंध हिंदी में।

Essay on Taj Mahal in Hindi

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Essay on Taj Mahal in Hindi 150 Words

ताजमहल एक बहुत खूबसूरत ऐतिहासिक इमारत है। जो कि मुगल बादशाह शाहाजाह ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में उनकी मृत्यु के पश्चात बनवाया था। यह भारत का एक सुन्दर पर्यटन स्थलों में से एक है। यह आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित है। ताजमहल दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक है। यह पूर्णता संगमरमर से बनाया हुआ है जिससे इसकी सुन्दरता दुगनी हो जाती है। दुनिया भर से लोग इसे देखने के लिए भारत आते है। रात के समय चॉद की रोशनी में इसकी सुन्दरता देखने योग्य है।

ताजमहल आगरा के किले के बिल्कुल पीछे बना हुआ है। शाहाजाह ने अपनी पत्नी की याद में एक कब्र बनाने का निर्णय लिया और उसने ताजमहल का निर्माण कराया। ताजमहल वर्ष 1631 ई0 में बनवाया गया था इसके चारो कोनो में मीनारे है व बीच में एक बहुत बडा गुम्बद्व है। इसे बीस हजार मजदूरों द्वारा लगभग 20 सालों में बनाया गया था। ताजमहल को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में भी स्थान प्राप्त है।

Essay on Taj Mahal in Hindi 500 Words

रूपरेखा : ऐतिहासिक स्मारकों का महत्त्व। ताजमहल का इतिहास, कला, सौंदर्य, अनुपम रूप, ताजमहल का शिल्प, ताजमहल और चाँदनी रात, उपसंहार।

किसी देश का शिल्प-सौंदर्य उसकी सभ्यता और संस्कृति के उत्कर्ष का परिचय देता है। भारत शिल्प-सौंदर्य की दृष्टि से एक अद्भुत देश है। इस देश के स्मारकों, स्तूपों, खंडहरों आदि में उच्चकोटि की कला के दर्शन होते हैं।

तमिलनाडु में मीनाक्षी मंदिर, राजस्थान में दिलवाड़ा जैन मंदिर, अमृतसर का स्वर्ण मंदिर, महाराष्ट्र में अजंता और ऐलोरा की गुफ़ाएँ, उड़ीसा में पुरी और कोणार्क के मंदिर हमारी शिल्पकला की उत्कृष्टता, भव्यता और विविधता के उदाहरण हैं। भारत ने वास्तुकला, चित्रकला आदि ललित कलाओं के क्षेत्र में जो दक्षता प्राप्त की है, ये स्मारक उसी की गौरव गाथा सुनाते हैं। इन स्मारकों में आगरा के ताजमहल का विशेष स्थान है। इसकी पच्चीकारी और निर्माणकला को जो भी देखता है, वह चकित रह जाता है। श्वेत संगमरमर से बने इस स्मारक की उज्ज्वल आभा देखते ही बनती है। प्रतिवर्ष आने वाले हज़ारों पर्यटक ताजमहल के अवितीय सौंदर्य की सराहना करते नहीं थकते।

ताजमहल के अद्भुत और अनुपम सौंदर्य के कारण इसकी गणना संसार की सर्वश्रेष्ठ इमारतों में की जाती है। इसे देखकर ऐसा लगता है मानो वास्तुकला ने ताजमहल में अपनी चरम सीमा को पा लिया है।

ताजमहल का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी बेगम की स्मृति में करवाया था। 1632 ई। में ताजमहल का निर्माण कार्य शुरू हुआ। लगभग बीस हज़ार देशी-विदेशी कारीगरों ने इसे सत्रह वर्ष में बनाकर पूरा किया था। शाहजहाँ ने इसके लिए श्वेत संगमरमर मकराना (राजस्थान) से, लाल पत्थर जयपुर से मँगवाए थे।

ताजमहल के लिए कारीगरों ने आगरा के पास यमुना नदी के किनारे एक खुला और विस्तृत स्थान चुना। ताज का निर्माण एक आयताकार समतल भूमि-खंड पर किया गया है। उत्तर-दिशा में यमुना प्रवाहित है और तीन ओर बगीचे हैं। बगीचों को इस ढंग से सँवारा गया है कि पूरा दृश्य बहुत मनमोहक बन गया है।

ताज के गुंबद और मीनारें दूर से ही दिखाई देती हैं। आगरा के किले में एक ऐसा शीशा लगा हुआ है, जिसमें ताजमहल की पूरी परछाईं देखी जा सकती है। कहते हैं कि आगरा के किले में कैद शाहजहाँ के कहने पर औरंगज़ेब ने यह शीशा लगवाया था, ताकि शाहजहाँ अपनी प्रिय पत्नी का स्मारक हर समय देख सके। मृत्यु के पश्चात् शाहजहाँ को भी उसकी इच्छानुसार यहीं दफ़नाया गया था।

ताजमहल के पास आने पर पहले लाल पत्थर के परकोटे दिखाई देते हैं। लाल पत्थर का विशाल फाटक पार करते ही वाटिका का सौंदर्य दर्शकों को आकृष्ट करने लगता है।

ताजमहल एक ऊँचे भव्य चबूतरे पर बना है। पूरा चबूतरा सफ़ेद संगमरमर का है और इसी के ऊपर दूध-सी सफ़ेद मीनारें हैं। शाहजहाँ और बेगम मुमताज़ का मकबरा सादगी भरे सौंदर्य का अनूठा नमूना है। ऊँचे गुंबद के नीचे मुमताज़ और शाहजहाँ चिरनिद्रा में सोए हुए हैं। इस गुंबद की दीवारों पर अद्भुत पच्चीकारी की गई है। संगमरमर के चार दालान अपनी भव्यता में बेजोड़ हैं। इन दालानों में बहुमूल्य पत्थरों को तराश कर बेल बूटे बनाए गए हैं। । जितनी बार ताजमहल को देखा जाए उतनी बार वह नया-सा प्रतीत होता है। इसे एक बार देखकर मन तृप्त नहीं होता। देखने की इच्छा बार-बार मन में उठती है। चाँदनी रात में तो ताज का धवल सौंदर्य देखते ही बनता है। शरद पूर्णिमा के दिन इसे देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है।

ताजमहल हमारी अमूल्य धरोहर है। इसकी सुंदरता की रक्षा करना हमारा पुनीत कर्तव्य है।

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