Gandhi Jayanti Essay in Hindi गांधी जयंती निबंध हिंदी में

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Gandhi Jayanti Essay in Hindi

गांधी जयंती निबंध

गाँधी-जयन्ती : गांधी-जयन्ती भी एक राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाई जाती है। गाँधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गांधी था। इनका जन्म 2 अक्तूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ।

गाँधी जी ने भारत छोड़ो आन्दोलन, असहयोग आन्दोलन, डाँडी यात्रा के द्वारा अंग्रेजी सरकार की गलत नीतियों का विरोध किया और भारत की सोई हुई आत्मा को जगाया। विश्व की पीड़ित और शोषित पीढ़ी के लिए मानव-कल्याण के कार्य किए। इसीलिए उनके जन्म दिवस को पूरे भारतवर्ष में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। गाँधी जी की पुण्यतिथि को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

महात्मा गाँधी ने भारत को आजादी दिलाने के लिए सत्य और अहिंसा को अपना अस्त्र बनाया। सन् 1942 में उन्होंने अंग्रेज़ो भारत छोड़ो” आन्दोलन चला कर भारत को एक सूत्र में पिरो दिया। इन्होंने कई बार जेल यात्राएँ की। उन्होंने देशवासियों और देश के सम्मान की रक्षा के लिए अत्याचारी को खुल कर चुनौती दी। उन्होंने देश को असहयोग का नया रास्ता दिखाया। आठ वर्ष तक रंग-भेद के विरोध में सत्याग्रह करते रहे। भारत की सोई हुई आत्मा को जगाया। इसलिए हम इन्हें ‘राष्ट्रपिता’ या ‘बापू’ कहते हैं।

“सत्य अहिंसा की ज्योत जगाई, एकता की राह बताई।

अहिंसा का तीर जो छोड़ा, डर गोरों ने भारत छोड़ा।”

गाँधी जयंती पर देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री तथा अन्य मान्यगण राजघाट दिल्ली में गाँधी जी की समाधि पर पुष्प अर्पित करके श्रद्धांजलि देते हैं। गाँधी जी ने लोगों को आदर्श जीवन जीने का उपदेश ही नहीं दिया बल्कि स्वयं जी कर दिखाया।

इस दिन पूरे भारत में दूसरे राष्ट्रीय पर्वो की तरह अवकाश रहता है। राष्ट्रीय पर्व हमारे देश-प्रेम, सत्य, अहिंसा और भारतीय शासन प्रणाली में भारतीयों की आस्था को प्रकट करते हैं। जबकि अहिंसा, प्रेम और सत्य गाँधी जी के ही तीन हथियार थे। इन्हीं से गाँधी जी ने स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी और सफलता पाई।

‘दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल,

साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।’

हेमंत कुमार साबरमती आश्रम में गाँधी जयन्ती पर विशेष प्रार्थना-सभा की जाती है। इस दिन चरखे पर सूत काता जाता है। जगह-जगह प्रार्थना सभाएँ होती हैं। इस प्रकार हम अपने राष्ट्रपिता के प्रति अपनी भावनाएँ अर्पित करते हैं। जिसमें गाँधी जी के प्रिय भजनों का गायन विशेष रूप से किया जाता है।

में भी गाँधी जी के जीवन से शिक्षा लेनी चाहिए, उनके बताए। मार्ग पर चलना चाहिए। भारत उनके द्वारा स्वतन्त्रता-सग्राम में किये योगदान के लिए सदैव उनका ऋणी रहेगा।

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