Essay on Kaha Raja Bhoj Kaha Gangu Teli in Hindi

Essay on Kaha Raja Bhoj Kaha Gangu Teli in Hindi for students of class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 and 12. कहां राजा भोज कहाँ गंगू तेली पर निबंध।

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Essay on Kaha Raja Bhoj Kaha Gangu Teli in Hindi

विचार-बिंदु – • कहावत का आशय • स्पर्धा और तुलना दो समानों में होनी चाहिए • बड़ों के सामने छोटे लोग दब जाते हैं • विभिन्न उदाहरण – अमीर-गरीब देशों की तुलना • खेलों के मुकाबले भी समान स्तर पर • बड़े लोग अपनी विजय के लोभ में खुले मुकाबले की बात करते हैं। यह अन्यायपूर्ण है।

इस कहावत का आशय है – दो असमानों में कभी तुलना नहीं हो सकती। जैसे मित्रता समान स्तर के लोगों में होती है, उसी प्रकार तुलना, समानता और स्पर्धा भी समान लोगों में होनी चाहिए। बडे-बडे ऐश्वर्यशाली राजाओं के सामने एक सामान्य-सा तेली कहाँ ठहर सकता है। वह तो बेचारा अपनी दीनता के भार से ही दब जाएगा। वह चाहकर भी श्रीमानों का मुकाबला नहीं कर सकेगा। अतः जब हम भारत, बंगलादेश या नेपाल जैसे देश की तुलना अमरीका के जीवन-स्तर से करते हैं तो वास्तव में अपने साथ अन्याय करते हैं।

जैसे पहलवानी में समान वजन के पहलवानों की कुश्ती होती है। क्रिकेट में जूनियर, सीनियर, महिला, पुरुष क्रिकेट के अलग-अलग मुकाबले होते हैं, उसी प्रकार जीवन के हर क्षेत्र में समानों की तुलना होनी चाहिए। बड़े लोगों का स्वार्थ यह हो सकता है कि वे स्वयं को विश्व का सर्वोच्च व्यक्ति सिद्ध करने के लिए सारे संसार को ललकारें तथा विश्व-समानता का नारा देकर छोटों को प्रतियोगिता में घसीटें, हराएँ तथा विजय-सुख लूटें। किंतु ऐसे मुकाबले अन्यायपूर्ण हैं, अभिप्रायपूर्ण हैं, छलपूर्ण हैं। समान स्तर के लोगों में समानता होनी चाहिए, न कि विषमों में।

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