Letter on Varshik Utsav in Hindi | अपने विद्यालय के वार्षिकोत्सव का वर्णन करते हुए मित्र को पत्र

Letter on Varshik Utsav in Hindi – मित्र को स्कूल के पारितोषिक – वितरण-उत्सव का वृत्तान्त। अपने विद्यालय के वार्षिकोत्सव का वर्णन करते हुए मित्र को पत्र । Write a letter on Varshik Utsav in Hindi.

Letter on Varshik Utsav in Hindi
अपने विद्यालय के वार्षिकोत्सव का वर्णन करते हुए मित्र को पत्र/ Letter on Varshik Utsav in Hindi

Letter on Varshik Utsav in Hindi

मोगा,

15 जुलाई 19….

प्रिय मित्र रंजीव,

                                   सप्रेम नमस्ते।

             तुम्हारा पत्र मिला। तुम मेरे स्कूल की गतिविधियों के बारे में जानने के लिए उत्सुक हो। सौभाग्यवश कल ही हमारे विद्यालय में जो पारितोषिक-वितरण उत्सव हुआ है, मैं तुम्हें उसका वृत्तान्त संक्षेप में लिख रहा हूं।


             उत्सव सुबह दस बजे आरम्भ होना था। स्कूल के खुले मैदान में पण्डाल सजाया गया था। उसे सजाने का काम दो दिन पहले ही शुरू हो गया था। शामियाना लगा कर चारों ओर कनाते लगा दी गई थी। लोगों के बैठने के लिए कुर्सियों का प्रबन्ध किया गया। दो स्टेज बनाए गए। एक स्टेज मुख्य अतिथि के बैठने के लिए फूलों से सजाया गया तथा दूसरा सांस्कृतिक कार्यक्रम दिखाने वाले बच्चों के लिए। विद्यालय में चारों ओर सफेद चूने का छिड़काव करवाया गया तथा मुख्य द्वार पर छठी कक्षा के दो बच्चे हाथ में गुलदस्ता लेकर खड़े थे। जिन्होंने मुख्य अतिथि को सम्मान-पूर्वक स्टेज तक ले जाना था। स्कूल इस भांति सजा हुआ था मानों नई-नवेली दुल्हन हो। सभी बच्चे अपनी स्कूल की वर्दी में बहुत अच्छे , लग रहे थे।


             ठीक पौने दस बजे स्कूल के प्रधानाचार्य कमेटी के सदस्य और कुछ स्टाफ के सदस्य हाथों में पुष्प मालाएं लिए मुख्य-द्वार पर मुख्य अतिथि की प्रतीक्षा में खड़े हो गए। पूरे 10 बजे हमारे मुख्य अतिथि शिक्षा-मन्त्री जी की कार मुख्य द्वार पर पहुंच गई। एकदम बैंड बजने लगा। प्रधानाचार्य सहित वहां पर खड़े लोगों ने उनका आगे बढ़ कर स्वागत किया तथा उन्हें पुष्प मालाएं पहनाई। तब छोटे-छोटे बच्चों ने उन्हें गुलदस्ते पकड़ाए और मुख्य-अतिथि जी को बैंड की ध्वनि से पण्डाल तक ले जाया गया। चारों ओर हंसी-खुशी का वातावरण छाया हुआ था। सवा दस बजे तक शिक्षा-मन्त्री जी प्रधान की कुर्सी पर विराजमान हो गए। बच्चों ने तालियां बजा कर उन का अभिनन्दन किया और सभी लोग जो वहां उपस्थित थे उन्होंने खड़े होकर उनका स्वागत किया। सबसे पहले उनके सम्मान में सामूहिक गान पेश किया गया फिर उनके सम्मान में अभिनन्दन पढ़ा गया और उसके पश्चात् एक घण्टे तक मनोरंजन का कार्यक्रम चलता रहा। हमारे स्कूल की भंगड़ा-टीम ने तो सब को मंत्रमुग्ध कर लिया। कार्यकम में पी. टी. शो, डंबल, तथा कुछ नाटक दिखाए गए।


         अन्त में स्कूल की सभी श्रेणियों के उन विद्यार्थियों को पुरस्कार वितरित किए गए जिन्होंने बोर्ड में तथा स्कूल की परीक्षाओं में उच्च स्थान प्राप्त किए थे। उसके पश्चात् मुख्य-अतिथि जी ने भाषण दिया तथा हमारे प्रधानाचार्य ने उनका तथा बच्चों के माता-पिता का धन्यवाद किया। इसके पश्चात् कार्यक्रम में भाग लेने वाले बच्चों, उनके माता-पिता के लिए मुख्य अतिथि सहित जलपान का प्रबन्ध किया हुआ था।


             यह उत्सव देखकर मुझे अपार प्रसन्नता हुई तथा यह प्रेरणा भी मिली कि अब की बार में भी खुब परिश्रम कर के उच्च स्थान प्राप्त करूंगा। आगामी वर्ष होने वाले उत्सव में मैं भी पुरस्कार प्राप्त कर सकूं।


             अपनी ओर से मैंने पूरा वर्णन लिखने की चेष्टा की है फिर भी अगर आप भी इस उत्सव में सम्मिलित होते तो और ही आनन्द होता। शेष शुभ। पूज्य-माता-पिता जी को चरण-वन्दना तथा रिंकू को प्यार।

आप का स्नेही
अ, ब, स

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