मन के हारे हार है मन के जीते जीत पर निबंध – Man ke hare har man ke jeete jeet Essay in Hindi

Today we are going to write Man ke hare har man ke jeete jeet Essay in Hindi – मन के हारे हार है मन के जीते जीत पर निबंध for students of class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 and 12.

Man ke hare har man ke jeete jeet Essay in Hindi
मन के हारे हार है मन के जीते जीत पर निबंध

Man ke hare har man ke jeete jeet Essay in Hindi

विचार-बिंदु – • अर्थ • मन से हारा व्यक्ति असफलता के भय से ग्रस्त • उसकी शक्ति मंद • कर्म शिथिल • आत्मविश्वासी के काम सँवरते हैं • मुसीबतों का कष्ट विदा हो जाता है • शत्र भयभीत • विजय का मार्ग खुल जाता है।

यह लोकोक्ति अक्षरशः सत्य है। मन से हारा हुआ व्यक्ति कोई भी कार्य या संघर्ष करने से पहले हार जाता है। वह अपनी सफलता का विश्वास नहीं सँजो पाता। मन में हारने का भय मनुष्य को भयभीत बना देता है। भयभीत आदमी हिचक-हिचक कर, रुक-रुक कर काम करता है। वह अपने आप को पूरी शक्ति से लक्ष्य में झौंक नहीं पाता। परिणाम यह होता है कि उसके हाथ ढीले पड़ जाते हैं, पैरों की गति मंद हो जाती है। अतः व्यक्ति अपेक्षित सफलता नहीं पा पाता।

इसके विपरीत जो व्यक्ति आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरता है, उसके बिगड़े काम सँवर जाते हैं। उसे मार्ग की कोई मुसीबत, मुसीबत नहीं लगती। विश्वास की शक्ति से संपन्न होने पर शरीर और मन में इतनी ताकत आ जाती है कि सारे कष्ट स्वयं संकट से घिर जाते हैं, शत्रु दूर भाग जाते हैं। सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि आत्मविश्वासी मनुष्य राह के कष्टों को कष्ट मानता ही नहीं। इस प्रकार उसकी विजय निश्चित हो जाती है। इसीलिए प्रभु से प्रार्थना की गई है –

हमको मन की शक्ति देना, मन विजय करें।
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें।

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