मेरी रूचि पर निबंध – My Hobby Essay in Hindi – मेरा प्रिय शौक

My Hobby Essay in Hindi – मेरी रूचि पर निबंध / मेरा प्रिय शौक | Write My Hobby Essay in Hindi. My Hobby Essay in Hindi was recently asked in many classes. Now read and write My Hobby Essay in Hindi in more than 300 words.

My Hobby Essay in Hindi
मेरी रूचि पर निबंध – My Hobby Essay in Hindi

My Hobby Essay in Hindi 200 Words

प्रत्येक व्यक्ति को कुछ चीजों के लिए किसी तरह की पसंद या नापसंद होनी चाहिए और हम सबमे कुछ ऐसे शौक है जो हमारे अवकाश के समय में हमें व्यस्त रखते है। मेरा भी एक शौक है और वो है चित्रों की पेंटिग करना। किसी ने कभी भी मुझे पेंटिग नही सिखायी है। मुझे याद है कि मैने हाथी के चित्र से पेंटिग बनाने की शुरूवात की थी और फिर, एक शेर और एक पक्षी उसके बाद, मैने झोपड़ी, बाग, गॉव के रास्ते, पहाडीयों, बादलों, सूरज, चॉद, नीले आकाश में उडते पक्षी, और फिर इस तरह मै चित्र बनाता चला गया। इस तरह से अपने शौक को आज भी बनाया हुआ है।

जब भी मुझे कुछ खाली समय मिलता है। तो मैं अपनी कलम, ब्रुश और ड्राइंग पेपर के साथ कुछ ऐसी चीजें बनाना चाहूंगा जो अचानक मेरा दिमाग में आ जाती है। अब मुझे इसके लिए कोई विशेष तैयारी नही करनी पड़ती। मैं आजादी से किसी भी वस्तु चेतन या निर्जीव, मंदिर या चर्चे, धोड़े, मेंढक या शेर के चित्र को आराम से बना सकता हूँ। कोई और भी चीज मेरी चित्रकला का विषय बन जाता है। मेरा शौक मुझे अपने खाली समय में व्यस्त रखता है और मुझे अपने शौक से खुशी और संतुष्टि की प्राप्ती होती है ।

My Hobby Essay in Hindi 250 Words

किसी भी वास्तु जा कुछ कर दिखने का दम एक बहुत अच्छा शौंक हे, जो एक व्यक्ति को छोटी उम्र से ही प्राप्त होता हे. हलाकि किसी बी शौंक को किसी भी आयु में विकसित किया जा सकता हे, पर बचपन का शौंक एक अलग ही महत्व रखता हे. ज्यादातर सभी अपनी रूचि के अनुसार कामो को करते हे, जिस से उसे ख़ुशी और आनंद प्राप्त करते हे.

जब में बिलकुल फ्री होता हु तो सबसे ज्यादा फुटबॉल खेलना पसंद करता हु, जो की मेरा सबसे पसंदीदा शौंक हे. घर पहुँच के स्कूल का काम ख़तम करने के बाद में अपना अधिकतर समा फुटबॉल खेलने में बतीत करता हु. में बचपन से बी फुटबॉल खेल का बहुत शोकीन हु. जब में कक्षा एक में था, तब मेरी आयु मात्र पांच साल की थी और उसी वक्त से मुझे फुटबॉल खेल से प्यार हो गया था. बाद में मेरे पिता जी ने मेरे फुटबॉल खेलने के शौंक को मेरे कक्षा अध्यापक को बताया, ढीक उसी वक़्त से मेरे स्कूल में मेरी फुटबॉल की ट्रेनिंग भी शुरू हो गयी थी. केवल फुटबॉल ही नहीं, में अब स्कूल की और प्रतियोगताओं में भी भाग लेता हूँ और आगे भी लेता रहूँगा. मेने अपने स्कूल की टीम से खेलते हुए बहुत पुरुस्कार भी जीते हे, जिस पर मुझे, मेरे माता- पिता और स्कूल के टीचर्स को काफी गर्व हे.

अभी तो सिर्फ मेने विद्यालय के स्तर पर खेल कर अपने विद्यालय का नाम रोशन किया हे. आने वाले समय पर में और भी ज्यादा मेहनत करूंगा ताकि में कॉलेज लेवल फिर स्टेट लेवल और आखिर पर इंटरनेशनल लेवल पर फुटबॉल खेल कर अपने देश का नाम रोशन करू.

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