Nelson Mandela in Hindi Biography नेल्सन मंडेला की जीवनी

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Nelson Mandela in Hindi Biography

अफ्रीकी नैशनल कांग्रेस के नेता नेल्सन मंडेला विश्वविख्यात पुरूष, राजनेता और मानवतावादी थे। दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने अपने देशवासियों के नागिरक अधिकारों, स्वतन्त्रता, न्याय और आत्मसम्मान के लिए एक लम्बा संघर्ष किया उन्होंने रंगभेद को समाप्त कराने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें तथाकथित देशद्रोह के अपराध में 1962 में जेल भेज दिया गया और 27 वर्ष बाद 1989 में रिहा किया गया। लेकिन मंडेला ने अपने लम्बे संघर्ष में कभी हिंसा का सहारा नहीं लिया। उन्होंने हमेशा शांति व अहिंसा का मार्ग ही स्वीकार किया।

रंगभेद और जातिभेद की दु:खद कहानी का प्रारम्भ दक्षिणी अफ्रीका में 20वीं सदी के प्रारम्भ से हुआ। बोअर लोगों ने इस रंगभेद की शुरूआत की। बोअर लोग यूरोपीय मूल के लोग थे और दीर्घ काल तक वहां शासन करते रहे। अफ्रीकी नैशनल कांग्रेस की 1912 में स्थापना हुई। इसका प्रमुख उद्देश्य रंगभेद, अन्याय और शोषण को समाप्त कर समानता, स्वतन्त्रता तथा न्याय पर आधारित समाज की स्थापना करना था। वहां की अल्पसंख्यक गोरी सरकार ने ऐसे कानून बनाये जो रंगभेद, जातीय असमानता और शोषण को बढ़ावा देने वाले थे। गोरी सरकार ने कांग्रेस को अवैध घोषित कर उस पर पाबंदी लगा दी। सन् 1960 में रंगभेद विरोधी आन्दोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया और 20 हजार लोगों ने शापविल में एक बहुत बड़ा प्रदर्शन किया। प्रारम्भ में सब कुछ शांतिपूर्ण था परन्तु तुरन्त ही भीड़ अनियंत्रित और हिंसक हो उठी और पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं जिस कारण 67 अफ्रीकी लोग मारे गये तथा 186 लोग घायल हो गये।

सन् 1980 तक कई देशों ने इस घटना को प्रतिक्रिया स्वरूप दक्षिणी अफ्रीका पर प्रतिबंध लगा दिये। 1970 के बाद वर्षों में गोरी सरकार ने कुछ रियायतें देना शुरू किया और कुछ नीग्रो संगठनों को काम करने की छूट दे दी। 1980 में नीग्रो लोगों के अतिरिक्त अन्य लोगों को संसद में प्रवेश की अनुमति दे दी। लेकिन अफ्रीकी नैशनल कांग्रेस रंगभेद को पूरी तरह समाप्त करना चाहती थी। अत: इसने अपना संघर्ष जारी रखा। 1990 में जब डी क्लार्क वहां के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने रंगभेद को समाप्त कर काले लोगों और उनके राजनीतिक दलों पर से सभी प्रतिबंध हटा दिये। वे उदार विचारधारा और खुले दिमाग के व्यक्ति थे। सभी राजनीतिक बंदियों को उन्होंने जेलों से छोड़ दिया।

1994 में पहले ऐसे आम चुनाव दक्षिणी अफ्रीका में हुए जिसमें 1 करोड़ 80 लाख नीग्रो लोगों ने भी भाग लिया। इसके साथ ही 300 वर्षों से चले आ रहे जातीय संघर्ष और रंगभेद की समाप्ति हो गई। मंडेला की अफ्रीकी नैशनल कांग्रेस को 65 प्रतिशत मत मिले। इस बढ़त के कारण नैलसन मंडेला वहां के प्रथम नीग्रो राष्ट्रपति बनाये गये। यद्यपि नेल्सन मंडेला के नेतृत्व में वहां के लोगों ने रंगभेद और जातीय असमानता के विरुद्ध एक बहुत बड़ी विजय पाई थी परन्तु दक्षिणी अफ्रीका के सामने कई बड़ी-बड़ी चुनौतियां तथा समस्याएं थीं। मंडेला उनके समाधान में जी-जान से जुट गये। अंतत: मंडेला ने सन् 1999 में सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लिया। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान दिये गये। इन में 1993 में उन्हें शांति के लिए दिया गया नोबल पुरस्कार सबसे उल्लेखनीय है।

नेल्सन मंडेला का जन्म 18 जुलाई, 1918 को उमतला के निकट ट्रांसको में हुआ था। अपने छात्रकाल से ही उन्होंने सक्रिय राजनीति में भाग लेना शुरू कर दिया। अत: उन्हें विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया। सन् 1994 में मंडेला ने अफ्रीकी नैशनल कांग्रेस की सदस्यता ले ली और रंगभेद तथा नस्ली अन्याय के विरुद्ध संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाने लगे। उन्होंने भूमिगत होकर अपना संघर्ष जारी रखा परन्तु 1962 में पकड़े गये और दो वर्ष पश्चात् उन्हें जेल भेज दिया गया। लेकिन जेल में रहकर भी वे इस संघर्ष में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते रहे। शीघ्र ही वे इस संघर्ष के प्रमुख नेता और महान मार्गदर्शक बन गये। वहां की गोरी सरकार को भी मंडेला का महत्त्व और मूल्य शीघ्र ही पता लग गया और वह उनसे बातचीत करने लगी। राष्ट्रपति एफ. डब्लू. डी. क्लार्क ने उनके साथ जेल में और वहां से बाहर आने पर अपना वार्तालाप व समझौते की प्रक्रिया जारी रखी।

क्लार्क समस्या के शांतिपूर्ण हल के पक्ष में थे लेकिन स्थिति ने उस समय उग्र रूप धारण कर लिया जब दक्षिण अफ्रीकी कांग्रेस के एक बहुत बड़े गुट ने, हिंसक संघर्ष शुरू कर दिया। इससे देश में नफरत, द्वेष और हिंसा का वातावरण बन गया और शांति प्रक्रिया को बड़ी हानि पहुंची। दूसरे ओर अल्पसंख्यक गोरे लोग भी हिंसक प्रदर्शन करने लगे और नीग्रो लोगों को उनके अधिकार दिये जाने का विरोध करने लगे। लेकिन मंडेला ने बहुत सूझबूझ, धैर्य और राजनीतिक परिपक्वता का परिचय देते हुए समस्या को सुलझा लिया।

मंडेला पर गांधी जी का बहुत प्रभाव है। वे गांधी जी की अहिंसा, अवज्ञा आंदोलन तथा असहयोग में विश्वास रखते हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए हमेशा शांतिपूर्ण उपाय अपनाये। अतः उन्हें अफ्रीकी गांधी के नाम से भी जाना जाता है। मंडेला के राष्ट्रपति बन जाने के साथ ही दक्षिणी अफ्रीका पर विभिन्न देशों द्वारा लगाये गये प्रतिबंध भी समाप्त कर दिये गये। मंडेला भारत के एक बहुत बड़े मित्र तथा प्रशंसक हैं और कई बार यहां आ चुके हैं। 1979 में उन्हें जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार से सम्मानित किया गया और 1990 में उन्हें देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया। सन् 2000 में पुन: उन्हें गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मंडेला अपने धैर्य और राजनीतिक उदारता के लिए भी बहुत विख्यात हैं। मंडेला का विवाह सन् 1958 में विनी मंडेला से हुआ था। विनी ने देश की स्वतन्त्रता के संग्राम में अपने पति मंडेला का पूरा साथ दिया।

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