Essay on Rainy Day in Hindi

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Essay on Rainy Day in Hindi

(समरूपी विषय – जब मैं बारिश में भीगा, जीवन का अविस्मरणीय अनुभव, रिमझिम आई बरखारानी)

भूमिका

वर्षा काल मेघ नभ छाए,
गरजत लागत परम सुहाए

अनेक कवियों ने सुहानी वर्षा ऋतु का वर्णन भाँति-भाँति कर इसे ऋतुओं की रानी कहा है। ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की प्रचंड किरणों से धरती तपती प्रतीत होती है, प्रत्येक जीव गरमी से व्याकुल होकर त्राहि-त्राहि करने लगता है और आकाश की ओर टकटकी लगाकर बादलों के लिए लालायित हो उठता है। ऐसी ही ज्येष्ठ मास का आग उगलती दोपहर में पशु-पक्षी, जीव-जंतु, बालक-वृद्ध सभी इंद्र देव से वर्षा की प्रार्थना करने लगते हैं।

वर्षा का स्वागत

ग्रीष्मावकाश के बाद स्कूल का पहला दिन था। नए उल्लास और उमंग के साथ हम सभी विद्यालय आए थे, किंतु गरमी की भीषणता से सब बेचैन थे। विद्यालय की छुट्टी होने ही वाली थी कि अचानक आकाश काले-काले बादलों से भर गया। काली घटा ने सूरज को पूरी तरह ढक लिया था। पुरवैया हवा चलने लगी थी और बीच-बीच में बादलों की गर्जना भी सुनाई पड़ रही थी। वर्षा की संभावना देखकर तत्काल हमारी छुट्टी कर दी गई। अभी हम थोड़ी दूर ही गए थे कि हल्की बूंदाबाँदी शुरू हो गई। मैंने अपने मित्रों से खुश होते हुए कहा-“लगता है आज खूब जमकर वर्षा होगी। बड़ा मज़ा आएगा।” मेरे मित्रों ने भी मेरी बात का समर्थन किया और सचमुच देखते-ही-देखते तेज़ वर्षा होने लगी। आसपास कहीं वर्षा से बचने की जगह नहीं थी। हम खुली सड़क पर चल रहे थे, तभी हम सबने बारिश में भीगने और उसका पूरा आनंद लेने का निश्चय किया। आसपास और भी बहुत-से लोग भीगकर मानो वर्षा का स्वागत कर रहे थे। छोटे बच्चे भी किलकारी मारते हुए अलौकिक सुख का अनुभव कर रहे थे।

वर्षा का सर्वव्यापी प्रभाव – कुछ समय तक सब कुछ ठीक रहा, परंतु फिर एकाएक बारिश ने रौद्र रूप धारण कर लिया। तेज़ मूसलाधार वर्षा होने लगी। हमें पास ही बस-स्टैंड दिखाई दिया, वहाँ खड़े होकर हम बारिश से बचने का असफल प्रयास करने लगे। लगभग दो घंटे इसी प्रकार वर्षा होती रही। सड़कों पर पानी-ही-पानी भर गया। जल-थल सभी मिलकर एकाकार हो गए थे। कुछ लोग बरसाती पहने जा रहे थे तो कुछ केवल छाते से ही अपनी रक्षा कर रहे थे। कुछ ऐसे भी थे, जो पूरी तरह भीगते हुए जा रहे थे। मानो उन्हें वर्षा की बिलकुल परवाह ही न हो। अचानक बहुत तेज़ हवा चलने लगी। ऐसा लग रहा था, तूफ़ान ही आ जाएगा। चाय की दुकान का टीन का टुकड़ा उड़कर कहीं दूर जा गिरा। आसपास के कई पेड़ टूटकर गिर गए। सड़क पर पानी का स्तर बहुत बढ़ गया था। पानी के ऊपर अनेक बरतन, जूते-चप्पल आदि तैरते हुए दिखाई दे रहे थे। हम बारिश में पूरी तरह भीग चुके थे। ठंड और भय के कारण हमारा हाल बहुत बुरा हो रहा था। मैं जल्दी-से-जल्दी घर पहुँचना चाह रहा था, लेकिन दूर-दूर तक बस का नामोनिशान तक न था। तभी मैंने देखा, दो आदमी पूरी तरह भीगे हुए किसी प्रकार घुटनो तक आ चुके पानी में चल रहे थे। अचानक उनमें से एक का पैर फिसला और वह लगभग गिरने ही वाला था कि उसके साथी ने उसे किसी प्रकार सँभाल लिया। शायद वहाँ कोई गड्ढा आ गया था, जिसे वे पानी के कारण देख नहीं पाए थे। इस दृश्य को देखकर न चाहते हुए भी हमारे मुँह से बरबस ही हँसी निकल गई और वे बेचारे शर्म के मारे गरदन नीची करके वहाँ से चले गए।

धीरे धीरे वर्षा का वेग रुका। आसपास खड़े हुए लोग यही प्रतीक्षा कर रहे थे। सभी अपने-अपने गंतव्य की और चल दिए। तभी सामने से हमारी बस आती दिखाई दी। में अत्यंत सावधानीपूर्वक बस-स्टैंड से नीचे उतरकर बस में चढ़ने की कोशिश कर ही रहा था कि मेरा भी पैर फिसल गया और में पानी में गिर गया। मेरे मित्रों ने मुझे उठाया और बस में चढ़ने में मेरी मदद की। घर तक पहुँचते-पहुँचते शाम घिर आई थी। घर पर सभी मुझे लेकर चिंतित थे। मुझे सकुशल देखकर सबकी जान में जान आई। बारिश में भीगने का यह मेरे जीवन का पहला अवसर था। मुझे बहुत तेज़ सरदी लग रही थी। मम्मी ने झटपट मेरे कपडे बदलवाए, मेरे बस्ते का सामान हवा में फैलाया। और मेरे लिए गरमागरम कडक चाय बनाकर लाई। चाय और माँ के ममता भरे स्पर्श की गरमी से मुझे जल्द ही नाद आ गई। जब मैं सोकर उठा, आसमान बिलकुल स्वच्छ हो चूका था। बादलों का कहीं नामोनिशान तक न था किंतु मेरे मनोमस्तिष्क पर तो उस दिन का अनुभव स्थायी रूप से अंकित हो चुका है।

उपसंहार – निस्संदेह वर्षा हमारे खेतों, बाग-बगीचों को हरा-भरा करती है, गरमी से तप्त प्राणियों को शीतल करती है, किंतु अतिवृष्टि से बाढ़ आ जाती है जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। बहुत-सा नुकसान होता है। अतः ईश्वर से यही कामना है कि समय पर वर्षा ज़रूर करें किंतु संतुलन में। बारिश सबके लिए आनंददायक हो, मंगलकारी हो। जब-जब वर्षा होती है, उस अनोखे अनुभव की स्मृति ताज़ा हो जाती है और मेरा मन-मयूर वर्षा के आनंद के लिए मचल उठता है।

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