Essay on Himachal Pradesh in Hindi हिमाचल प्रदेश पर निबंध

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Essay on Himachal Pradesh in Hindi

हिमाचल प्रदेश का गठन 15 अप्रैल, 1948 को इस पहाड़ी प्रदेश की 31 छोटी बड़ी रियासतों को मिलाकर किया गया था। तब यह ‘ग’ श्रेणी का राज्य बना था लेकिन बाद में इसे केन्द्र शासित प्रदेश बना दिया गया। राज्य के राजनीतिक नेताओं ने तत्कालीन मुख्यमन्त्री डा बलवन्त सिंह परमार के नेतृत्व में हिमाचल को पूर्ण राजत्व दिलाने के लिए वर्षों तक शांतिपूर्ण संघर्ष किया और अन्त में वे सफल हुए और हिमाचल पूर्ण राज्य बना। भारतीय गणतन्त्र का अठारहवां राज्य हिमाचल प्रदेश पहाड़ी लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक है। यहां के लोगों के वर्षों के अनवरत संघर्ष के फलस्वरूप वर्तमान रूप में इस राज्य का अभ्युदय 25 जनवरी, 1971 को हुआ जब प्रधानमन्त्री स्वर्गीय श्रीमती इन्दिरा गांधी ने विधिवत् एक समारोह में इसका उदघाटन किया।

हिमाचल प्रदेश की सीमाएं पंजाब, हरियाणा एवं जम्मू कश्मीर के साथ जुड़ी हुई हैं। यह भारत के छोटे राज्यों में से एक पहाड़ी राज्य है जिसकी राजधानी शिमला है। देवभूमि और ऋषि मुनियों की यह तपोभूमि है। माण्डूक्य ऋषि ने यहां उपनिषद् की रचना और महर्षि व्यास ने महाभारत जैसे विशाल काव्य की सृजना यहां पर की। इतिहास बताता है कि इस प्रदेश में हर्षवर्धन ने सातवीं शताब्दी में तथा आठवीं शताब्दी में यहां पर मुक्तादित्य का शासन रहा।

पन्द्रहवीं शती में राजा केहर सिंह ने यहां राज किया। अठाहरवीं शती में गोरखों ने यहां के बुशैहर पर आक्रमण किया लेकिन वे हार कर भाग गए। उसके पश्चात् यह प्रदेश अंग्रेजी सरकार के अधीन हो गया और इस प्रदेश के शासन को राजा महेन्द्र सिंह, उसके पुत्र शमशेर सिंह और पौत्र रघुनाथ सिंह ने चलाया।

स्वतन्त्रता का युग आने के बाद हिमाचल ने भी करवट बदली और यह एक पूर्ण राज्य बना। इसके प्रमुख जिलों में कांगड़ा, ऊना, किन्नौर, कुल्लू, चम्बा, बिलासपुर, मण्डी, सोलन, शिमला, सिरमौर, हमीरपुर तथा लाहौल और स्पीती हैं। पहाडियों से घिरा और उनके गोद में बसे हिमाचल का जलवायु अत्यंत स्वास्थ्य वर्धक है। घने जंगल, बर्फ से लदी चोटियां, बहते-झरने, नदी-नाले इसके मुख्य आकर्षण हैं।

हिमालय के वक्ष पर फैले इस राज्य में प्रकृति ने उन्मुक्त भाव से सौन्दर्य को चारों ओर छिटकाया है। समूचे राज्य में अनेक सौन्दर्य-स्थल और पर्यटन-स्थल हैं। हिमाचल की राजधानी शिमला है, जिसे पर्वतों की रानी कहा जाता है। कुफरी, नालदेहरा, चम्बा, मंडी, डलहौजी, चायल, कांगड़ा, कुल्लू, मनाली, पौंटा आदि स्थान अपने सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध हैं। प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक यहां आते हैं और प्राकृतिक दृश्यों का आनन्द उठाते हैं।

हिमाचल को भारत का स्विट्ज़रलैंड मान लिया जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। चम्बा का मिंजर मेला, रामपुर बुशहर का लवी मेला, कुल्लू का दशहरा, कुफ्री का वार्षिक स्कीइंग उत्सव जगत् प्रसिद्ध हैं। बोटिंग के लिए रेणुका, रिवाल्सर तथा गोबिन्दसागर, मछली के शिकार के लिए रोहड़, वरोट तथा गिरी नदी आदर्श स्थल हैं।

यहां की शैल-मालाएं, घाटियां, शीतल हवा, शीतल अमृत जैसा मृदु जल, सतलुज, व्यास और रावी नदियों की धारा छोटे-छोटे झरने और बरसात में उफनते नाले, सीढ़ीदार खेत, पहाड़ों पर बसे गांव मनमोह लेते हैं।

हिमाचल प्रदेश की संस्कृति भारतीय संस्कृति का यथार्थ रूप है। साधारण रहन-सहन और कठोर परिश्रम, ईमानदारी, भ्रातृत्व इसके मुख्य तत्त्व हैं। धार्मिक प्रवृत्ति के ये लोग अनेक शकुन और अन्ध विश्वासों को भी मानते हैं। हिमाचल की जनता धार्मिक प्रवृत्ति की है। यहां अनेक स्थानों पर माता के प्रमुख मन्दिर हैं। चिन्तपुण, ज्वालाजी, चामुण्डा देवी जी आदि तीर्थों में लाखों तीर्थ यात्री जाते हैं। कुल्लू का दशहरा, बिलासपुर में नैना देवी का मेला, बुशैहर का लवी मेला, मंडी में शिवरात्रि मेला, बहुत ही प्रसिद्ध मेले एवं उत्सव हैं। सामाजिक जीवन में अभी स्त्रियों की दशा में बहुत सुधार नहीं हुआ है लेकिन शिक्षा के प्रसार ने स्थिति बदल दी है।

शिक्षा के क्षेत्र में आज हिमाचल की दशा बहुत बदल गई है। विश्वविद्यालय, कॉलेज, सीनियर सैकेण्डरी स्कूल, मिडल और प्राइमरी स्कूलों की संख्या बढ़ गई है। मिडल स्कूल तो गांव-गांव में है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय बहुत प्रसिद्ध हैं। पहले हिमाचल में चिकित्सा सुविधाएं बहुत कम थीं, लेकिन अब राज्य भर में अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या बहुत हो गई है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण सेवाओं का निरन्तर प्रसार हो रहा है।

प्रदेश में छोटे-बड़े अनेक उद्योग स्थापित किए गए हैं। बिरोजा, तारपीन का तेल, चाय, शाल, केन-क्रेशर और फल तथा सब्जियों को डिब्बा बन्द करने के उद्योगों का काफी विस्तार हो चुका है। सोलन तथा कई अन्य नगरों में औद्योगिक बस्तियां बनाई गई हैं तथा सरकार उद्योगपतियों को काफी सुविधाएं दे रही है। पहाड़ी प्रदेश होने के कारण यहां पर फल आसानी से पैदा किये जा सकते हैं। सेब, नाशपाती, खुरमानी, आलू बुखारा, कच्चे बादाम आदि फलों का सीधा निर्यात किया जाता है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कई योजनाएं तथा सुधार कार्य किए जा रहे हैं जिससे अब यहां बहुत बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं तथा प्रकृति के सौन्दर्य का आनन्द लेते हैं।

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