मेरा प्रिय खेल कबड्डी पर निबंध Essay on Kabaddi in Hindi

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Essay on Kabaddi in Hindi

Essay on Kabaddi in Hindi 100 Words

कबड्डी भारत का सबसे पुराना खेल है। क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल जैसे खेलों के बीच कबड्डी मेरा प्रिय खेल है। इसमें तेज दिमाग और चुस्त शरीर दोनों चाहिए। ‘कबड्डी’ सीधा-सादा खेल है जिसमें किसी विशेष सामान की भी आवश्यकता नहीं होती। खेल के मैदान के बीचों-बीच रेखा खींच, खिलाड़ियों को दो टीमों में बाँटा जाता है। पहली टीम का खिलाड़ी दूसरी टीम के पाले में ‘कबड्डी-कबड्डी’ कहता उनके एक खिलाड़ी को छूकर अपने पाले में वापिस आता है। साँस टूटने पर या उस टीम के किसी खिलाड़ी दवारा पकड़े जाने पर आउट माना जाता है। अधिक अंक बनाने वाली टीम विजयी होती है। भारत के गाँवों में यह खेल बहुत प्रसिद्ध है। मुझे भी यह खेल बहुत अच्छा लगता है।

Essay on Kabaddi in Hindi 600 Words

हमारे स्वास्थ्य के लिए जितना खाना पीना जरूरी है उतना ही खेलना भी जरूरी है। प्रत्येक बच्चे के बचपन की शुरुआत खेल खेलने से ही होती है। आजकल भारत में.अनेक खेल खेले जाते हैं जैसे क्रिकेट, फुटबाल, हॉकी और कब्बडी इत्यादि। मुझे इन सब में सबसे अधिक अपना देशी खेल कब्बडी पसंद है। भारत में बहुत पुराने समय से कबड्डी लोकप्रिय खेल रहा है। ‘कबड्डी’ एक सुन्दर, सस्ता, सरल और स्वास्थ्यप्रद खेल है।

यह खेल ताकत और बुद्धिमत्ता का मिला – जुला संगम होता है। कबड्डी विशेष रूप से गाँव में ज्यादा खेला जाता है। कबड्डी खेल में मैदान के बीचों बीच एक लाईन खींचकर मैदान को दो भागों में बाँट दिया जाता है जिसे पाला कहते है। कबड्डी खेलने के लिए दो टीम होती है जिसमे 12-12 खिलाड़ी होते है लेकिन खेलते सिर्फ 7 खिलाड़ी ही हैं और बाकी के खिलाड़ी इसलिए होते हैं कि अगर किसी खिलाड़ी को चोट आ जाए तो उसकी जगह पर दूसरा खिलाड़ी खेल सके। अन्य खेलों जैसे क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल और वॉलीबोल आदि के लिये विशेष रूप से तैयार मैदान की आवश्यकता होती है जबकि कबड्डी के लिए किसी विशेष स्थान की जरूरत नहीं पड़ती। अन्य खेलों की तरह इसमें महंगे सामान और साधनों की आवश्यकता नहीं होती।

कबड्डी कंही भी और कभी भी खेली जा सकती है। सिक्का उछाल कर टॉस किया जाता है और इसी के साथ मुकाबला प्रारम्भ हो जाता है। टॉस जीतने वाला पहले आक्रमण करता है। गाँवों और शहरों में.जब बच्चे कबड्डी खेलते हैं तो किसी खाली मैदान के बीच एक लाइन खींच ली जाती है और दोनों टीमों में मुकाबला शुरू हो जाता है। पुराने जमाने में कबड्डी को खेलने के लिए कुछ अधिक नियम नहीं थे लेकिन जब से इस खेल को एशियाई खेलों का हिस्सा बनाया है तब से इसमें कुछ नियम बना दिए गए है। कबड्डी को लेकर बदलते खयाल का कारण बेशक प्रो कबड्डी लीग है। स्कूल और कॉलेज में इसका महत्व बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर भी कबड्डी की प्रतियोगिताएं होती हैं। वह दिन दूर नहीं जब यह खेल अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करेगा। कबड्डी खेल जितना भारत में प्रसिद्ध है, उतना ही नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका आदि देशो में भी यह बहुत प्रसिद्ध खेल है।

खेल आरम्भ होने पर एक ओर का खिलाड़ी कबड्डी – कबड्डी कहते हुए दूसरी ओर जाता है और निर्धारित समय में दूसरी ओर के खिलाड़ी को छूने की कोशिश करता है। यदि वह सुरक्षित लौट आता है तब विरोधी टीम के जितने भी खिलाड़ियों को उसने छुआ है वे सभी आउट माने जाते हैं। दूसरी ओर के खिलाड़ी उसे पकड़ने का प्रयत्न करते है। यदि दुसरी टीम के खिलाड़ी उसे उसके पाले में जाने से रोक ले तो वह ऑउट हो जाता है और दूसरी टीम को पॉइंट मिलता है।

जैसे जैसे पॉइंट बढ़ते है उस टीम के ऑउट हुए खिलाड़ी वापिस आतें रहते हैं। इसी क्रम से कबड्डी का खेल चलता रहता है। यह खेल देखने में जितनी साधारण लगता है खेलने में उतना ही कठिन है। जो टीम अधिक पॉइंट हासिल करती है वही टीम जीत जाती है।

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