Republic Day Essay in Hindi गणतंत्र दिवस पर निबंध

Republic Day Essay in Hindi. गणतंत्र दिवस पर निबंध। कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 के बच्चों और विद्यार्थियों के लिए गणतंत्र दिवस पर निबंध हिंदी में। Students today we are going to discuss a very important topic i.e Republic Day essay in Hindi. Republic Day essay in Hindi is asked in many exams. The long essay on Republic Day in Hindi is defined in more than 900 words. Learn about Republic Day essay in Hindi and bring better results in our exam.

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Republic Day Essay in Hindi 300 Words

गणतंत्र दिवस पर निबंध

गणतंत्र दिवस भारत का राष्ट्रीय पर्व है। यह दिवस भारत के गणतंत्र बनने की खुशी में मनाया जाता है। पूरा भारतवर्ष हर साल गणतंत्र दिवस बड़े धूमधाम से मनाता है क्योकि इसी दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। 26 जनवरी, 1950 के दिन भारत को एक गणतांत्रिक राष्ट्र घोषित किया गया था। 1947 में ब्रिटिश शासन से आजादी पाने के बाद भी भारत स्व-शासित देश नहीं था। 1950 में जब भारत का संविधान लागू हुआ तब भारत एक स्व-शासित देश बन गया। इसलिए हम हर साल गणतंत्र दिवस के रूप में इस दिन को धूमधाम से मनाते हैं। भारत सरकार द्वारा इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश भी घोषित किया गया है। भारत के लोग इस महान दिन को अपने तरीके से मनाते है।

गणतंत्र का अर्थ सभी देश के लोगों को शक्ति और स्वतंत्रता है ताकि देश को सही क्षेत्र या दिशा में नेतृत्व करने के लिए अपने नेताओं को चुन सकें। भारत एक गणराज्य देश है जहां जनता एक नेता, राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री आदि के रूप में अपने नेताओं का चुनाव करती है।

गणतंत्र दिवस पर भारत के राष्ट्रपति के समक्ष नई दिल्ली के राजपथ (इंडिया गेट) पर परेड का आयोजन होता है। भारत के संविधान के अनुसार डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने थे। भारत की जनता ने देश भर में खुशियाँ मनाई थी। तब से 26 जनवरी को हर वर्ष गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
हमारे महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत में पूर्ण स्वराज लाने के लिए बहुत कुछ संघर्ष किया है। उन्होंने ऐसा इसलिए किया ताकि उनके आने वाली पीढ़ी काँ कोई संघर्ष न करना पड़े और वो देश को आगे लेकर जा सकें। उनमें से हमारे कुछ महान भारतीय नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों का नाम हैं महात्मा गांधी, चन्द्र शेखर आजाद, भगत सिंह, उधम सिंह, सरदार बल्लभ भाई पटेल, लाला लाजपत राय, लाल बहादुर शास्त्री, जवाहर लाल नेहरू इत्यादि हैं। यह सभी लोग भारत को एक स्वतंत्र देश बनाने के लिए ब्रिटिश शासन के खिलाफ लगातार लड़ते रहे।

26 जनवरी के दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है लेकिन फिर भी गणतंत्र दिवस के दिन देश भर में विशेष कार्यक्रम होते हैं। विद्यालयों, कार्यालयों तथा सभी प्रमुख स्थानों में राष्ट्रीय झंडा तिरंगा फहराया जाता है। सभी बच्चे इनमें उत्साह से भाग लेते हैं। लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं, मिठाई खिलाते हैं। स्कूली बच्चे जिला मुख्यालयों, प्रांतों की राजधानियाँ तथा देश की राजधानी के परेड में भाग लेते हैं। विद्यालयों में लोकनृत्य, लोकगीत, राष्ट्रीय गीत तथा विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।

Republic Day Essay in Hindi 500 Words

गणतंत्र दिवस पर निबंध

जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं,

वह हृदय नहीं, पत्थर है, जिसमें देश से प्यार नहीं।

हमारे देश में अनेक पर्व और उत्सव मनाए जाते हैं। उनमें से कुछ त्योहार जाति विशेष तक ही सीमित होते हैं। लेकिन राष्ट्रीय पर्व तो प्रत्येक नागरिक के मन में उत्साह पैदा करते हैं।

26 जनवरी 1930 में जब लाहौर में रावी नदी के किनारे एक अधिवेशन हुआ तो उसमें भारतवासियों ने राष्ट्रीय झण्डे के नीचे खड़े होकर प्रतिज्ञा की कि हम भारत की आजादी की माँग करेंगे और उसके लिए अन्तिम साँस तक संघर्ष करेंगे।

15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतन्त्र होने के बाद डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने भारत का नया संविधान तैयार किया था। जिसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया । उस दिन भारत को गणतन्त्र राज्य घोषित किया गया । 26 जनवरी को ही गणतन्त्र दिवस कहते हैं। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद गणतन्त्र भारत के पहले राष्ट्रपति थे। उन्होंने पहली बार दिल्ली के लाल किले पर झंडा फहराया था।

*26 जनवरी आकर कहती है हमें बारम्बार,

संघर्षों से ही मिलता है जीने का अधिकार |

तब से प्रति वर्ष 26 जनवरी को यह पर्व मनाने की परम्परा चली आ रही है । यह पर्व पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। परन्त भारत की राजधानी दिल्ली में तो गणतन्त्र समारोह की शोभा ही निराली होती है । परेड शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति’ पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। राष्ट्रपति भवन से राष्ट्रपति की सवारी अपने अंगरक्षकों के साथ 14 घोड़ों वाली बग्घी में निकलती है। जब सवारी इंडिया गेट पर आती है वहाँ पर प्रधानमंत्री आदरणीय राष्ट्रपति का स्वागत करते हैं । कनॉट प्लेस, अजमेरी गेट, चाँदनी चौंक से होता हुआ लाल किले तक जाकर समाप्त हो जाती है। सलामी देने के लिए थल सेना, जल सेना, वायु सेना की चुनी हई टुकडियाँ सवारी के साथ-साथ चलती है। राष्ट्रीय धन के साथ राष्ट्रपति ध्वजारोहण करते हैं । इक्कीस तोपों की सलामी दी जाती है । वायुयान करतब दिखाते हुए राष्ट्रपति को सलामी देते है।

हैलीकॉप्टरों से फूल बरसाए जाते हैं । आकाश में तिरंगे गुब्बारे और सफ़ेद कबूतर छोड़े जाते हैं । अशोक चक्र’, ‘कीर्ति चक्र’ एवं ‘राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार’ आदि राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए जाते हैं । हर प्रदेश द्वारा लोक-नृत्य, शिल्प-कला एवं विकास कार्यों की झांकियाँ प्रस्तुत की जाती हैं । इस समारोह को देश-विदेश से लोग देखने आते हैं । यह पर्व हमारी राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है । इस दिन विद्यालयों लयों एवं कार्यालयों में कार्यक्रम आयोजित कर ध्वजारोहण किए जाते हैं । रात को सरकारी भवनों पर रोशनी की जाती है । इस दिन के उपलक्ष्य में हमें यह प्रतिज्ञा करनी चाहिए कि –

“तेरी रक्षा तन, मन- धन से, हम सब सदा करेंगे मिलकर ।

तेरे लिए जियेंगे हम सब, तेरे लिए मरेंगे मिलकर ।।”

तभी हम उन वीरों का कर्ज चुकता कर सकेंगे और अपनी आजादी को कायम रख सकेंगे।

Republic Day Essay in Hindi 600 Words

वैसे तो आजादी हमें 15 अगस्त 1947 को ही मिल गई थी, लेकिन वास्तविक या संवैधानिक स्वतंत्रता हमें 26 जनवरी सन् 1950 के दिन ही मिली। इसी दिन भारत में नया संविधान लागू हुआ और भारत एक गणतंत्र बन गया। भारतीय संविधान का लागू होना कोई सामान्य घटना नहीं थी। इसने देश को न केवल एक नये रूप में परिभाषित किया, अपितु उसे एक नया रूप रंग भी प्रदान किया। भारतीय संविधान के आमुख में स्पष्ट रूप से इन बातों को सम्मिलित किया गया कि:

“हम भारत के लोग भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, ‘लोकतंत्रात्मक-गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समानता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति को गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढसंकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज — इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मसमर्पित करते हैं।”

इस आमुख में स्पष्ट रूप से भारत के संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, और लोकतंत्रात्मक गणराज्य होने की बात कही गयी है। किसी भी भौगोलिक क्षेत्र-विशेष को एक राष्ट्र या देश के रूप में परिभाषित होने के लिए, कतिपय विशेषताओं की आवश्यकता होती है। इनमें से सर्वाधिक महत्वपर्ण विशेषता होती है उस क्षेत्र-विशेष की संप्रभुता। अर्थात् अपने सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक आदि प्रश्नों पर अपने निजी विवेक के आधार पर निर्णय लेने का अधिकार। भारत ने यह अधिकार 26 जनवरी, 1950 को प्राप्त कर लिया। हालाँकि हमारे देश को राजनैतिक आजादी सन् 1947 को ही प्राप्त हो गयी थी। किन्तु इसकी संवैधानिक अभिव्यक्ति 1950 में 26 जनवरी के दिन हुई। इसी दिन से हमारा देश एक सर्वप्रभुता-संपन्न गणराज्य के रूप में पहचाना गया।

संविधान सभा की प्रथम बैठक डॉ सच्चिदानंद सिन्हा की अध्यक्षता में 9 दिसम्बर, 1946 को हुई थी। बाद में संविधान सभा का स्थायी सदस्य डॉ। राजेन्द्र प्रसाद को बनाया गया। बाद में संविधान निर्माण के लिए प्रारूप समिति का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष पद पर 1947 को डॉ भीमराव अम्बेडकर को नियुक्त किया गया। 26 नवम्बर, 1949 को पारित हुए संविधान पर सभापति सहित अन्य सभी सदस्यों ने हस्ताक्षर किए और इसी दिन से संविधान सभा ने भारत के संविधान को अंगीकार कर लिया।

इसी के साथ डॉ राजेन्द्र प्रसाद को देश का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया और संविधान परिषद को ही संसद के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। इस अवसर पर दिल्ली के इंडिया गेट मैदान में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। सारा देश जिस देश-भक्ति की पवित्र भावना से ओत-प्रोत हो रहा था, उसकी उज्ज्वल अभिव्यक्ति इंडिया-गेट के इस भव्य मैदान में स्वयं ही देखी जा सकती थी। इस दिन राष्ट्रपति द्वारा इंडिया गेट पर तिरंगा फहराया जाता है और देश की सेनाएं इस उपलक्ष्य में राष्ट्रपति को तोपों की सलामी देती हैं। इस दिन सारे देश में अवकाश रखा जाता है और समस्त देशवासी इस दिन इंडिया-गेट पर आयोजित किए जाने वाले इस राष्ट्रीय उत्सव का हार्दिक रसास्वादन या तो अपने-अपने घरों में बैठकर टी-वी आदि के माध्यमों से करते है, या फिर इंडिया गेट पर पहुंचकर प्रत्यक्ष रूप से इस राष्ट्रीय उत्सव में मम्मिलित होते हैं।

यह दिन हमारे देश के राष्ट्रीय गौरव एवं उसकी शक्ति को भी प्रदर्शित करने का दिन होता है। देश की तीनों सेनाएं अपनी शक्ति का प्रदर्शन इंडिया-गेट के इस भव्य मैदान में करती हैं। वे देश के दुश्मनों को आगाह करती हैं कि अगर हमारे देश की तरफ टेढ़ी-आँख से देखा भी, तो तुम्हारा हाल बहुत बुरा होगा।

Republic Day Essay in Hindi 800 Words

गणतंत्र दिवस पर निबंध

26 जनवरी 1950 हमारा गणतन्त्र दिवस है। गणतन्त्र शासन की वह पद्धति है, जिसमें प्रजा के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि देश की बागडोर अपने हाथों में लेकर देश का शासन चलाते हैं तथा देश की सुख-समृद्धि के लिए प्रयत्नशील होते हैं। चुनाव विधि द्वारा जनता फिर से एक निश्चित अवधि के बाद नए प्रतिनिधियों को चुनती है। भारतीय संविधान में 22 भाग, 7 अनुसूचियां तथा 395 अनुच्छेद हैं। संविधान में यह स्पष्ट है कि भारत समस्त राज्यों का एक संघ होगा, जिसके अन्तर्गत चार प्रकार के राज्य होंगे। भारतीय संविधान में सभी भारतीय नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा का वचन दिया गया है। भारतीय संविधान धर्म-निरपेक्षता के महान् सिद्धान्त को प्राथमिकता देता है।

भारत की पवित्र धरती को मुगलों तथा अंग्रेजों जैसे अत्याचारी शासकों ने लगभग 500 वर्षों तक अपने अपवित्र कार्यों से अपवित्र कर दिया था। मुगलों के बाद अंग्रेजों ने इस देश को गुलामी की जंजीरों में जकड़ा। भारतीय उसी दिन से उस जाल को काटने के लिए प्रयास करते रहे। इस पुनीत संग्राम का प्रारम्भ झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के कर-कमलों से सन् 1857 में हुआ। संघर्ष की इस ज्वाला में बालक-वृद्ध, युवक-युवतियां, नर-नारी सभी झुलसते रहे। बलिदान की इस माला में भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त, खुदीराम बोस, ऊधम सिंह, पंजाब-केसरी लाला लाजपतराय, महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिल जवाहर लाल नेहरू, सुभाष चन्द्र बोस जैसे स्वतन्त्रता सेनानियों के ही रत्न नहीं पिरोये गए हैं अपितु इनकी संख्या अनगिनत है।

अनगिनत माताओं की गोदें सूनी हुईं और अनगिनत पत्नियों के सुहाग लुट गये। अनन्त बहनों के भाई स्वतन्त्रता की बलि-वेदी पर चढ़कर वीर गति को प्राप्त हुए। अनेक परिवार इस पवित्र यज्ञ की अग्नि में जलकर राख हो गए। जलियांवाला बाग, कामागाटामारू, साईमन कमीशन का विरोध, भारत छोड़ो आन्दोलन, विदेशी वस्त्रों की होली जलाओ तथा अनेक सत्याग्रह इस संघर्ष की कहानी ब्यान करते हैं। 26 जनवरी, 1930 को रावी के किनारे पर कांग्रेस का विशाल अधिवेशन हुआ, जिसमें सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पास किया गया था कि पूर्ण स्वराज्य प्राप्त करना हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है। नेहरू ने इस दिन घोषणा की थी कि जब तक हम पर्ण स्वराज्य प्राप्त नहीं कर लेंगे, तब तक न स्वयं चैन से बैठेंगे और न ही अंग्रेज सरकार को चैन से बैठने देंगे।

गणतन्त्र दिवस समारोह बड़े उत्साह से देश की राजधानी दिल्ली में मनाया जाता है। राजधानी की भव्यता इस दिवस पर देखने योग्य होती है। देश और विदेश के गणमान्य अतिथि इस समारोह को देखने दिल्ली आते हैं। इण्डिया गेट के विशाल मैदान में सेना के तीनों अंग-जल, स्थल, वायु सेना की टुकड़ियां राष्ट्रपति को सलामी देती हैं। राष्ट्रपति की सवारी देखने के लिए और उनका अभिवादन करने के लिए सड़कों पर एक विशाल जन-समूह एकत्रित होता है। सलामी के बाद सेना के शस्त्रों का प्रदर्शन किया जाता है। इस अवसर पर 31 तोपें दागी जाती हैं। सैनिक वाद्य विशेष धुन बजाते हैं। राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम अपना संदेश प्रसारित करते हैं। 26 जनवरी के समारोह में भिन्न-भिन्न राज्यों की अनेक संस्कृतियों, प्रगति कला-कौशल आदि से सम्बन्धित सुन्दर झांकियां प्रस्तुत की जाती हैं। अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम इस अवसर पर प्रदर्शित किये जाते हैं। संध्या के आगमन पर राजधानी विद्युत के रंगीन प्रकाश से जगमगा उठती है।

इस राष्ट्रीय पर्व को नगरों और गांवों, स्कूलों और कालिजों में भी मनाया जाता है। प्रभात-फेरी की धुन तथा गगन-भेदी नारों के साथ कार्यक्रम का शुभ आरम्भ होता है। यह पर्व राष्ट्रीय गान का गायन और भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न कार्यक्रमों से सम्पन्न होता है। कई प्रकार की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। एन. सी. सी. की विभिन्न शाखाएं, स्काऊट और गाईडज़, सेना और पुलिस, प्रान्तीय रक्षा दल आदि की परेड देखने योग्य होती है। दूरदर्शन और आकाशवाणी के माध्यम से इन कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है।

हमारे विद्यालय में भी इस पुनीत अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। प्रधानाचार्य ध्वजारोहण करते हैं। संस्कृति की गौरव-गाथा तथा शहीदों का पुण्य-स्मरण करने के साथ-साथ अनेक प्रकार की प्रतिस्पर्धाएं होती हैं और प्रधानाचार्य विजेताओं को पारितोषिक वितरित करते हैं। संध्या के आगमन पर नगर और गांव दीपमाला से सजाए जाते हैं।

विभिन्न रंगों का प्रकाश स्वतन्त्रता संग्राम की उज्जवल गाथा बताता है। राष्ट्र और संस्कृति में भी नर-नारी, युवक-युवतियां छोटे-बड़े सभी भाव-विभोर हो उठते हैं। सम्पूर्ण राष्ट्र अमर शहीदों की स्मृति में अपनी पावन श्रद्धांजलि अर्पित करता है तथा उन्हें नमन करता है। वस्तुत: यह दिवस हमारे संकल्प का दिवस है। इस दिन हम प्रण करते हैं कि हम अपनी गौरवशाली संस्कृति को नहीं भूलेंगे तथा अपने राष्ट्र की अखण्डता तथा एकता को बनाए रखेंगे। वतन पर मर-मिटने वालों की स्मृति हमें संदेश देती है कि हम भी उनके पद-चिन्हों पर चलकर देश का गौरव बनाए रखें।

क्या गणतन्त्र के विधान में सभी नागरिक देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझते हैं ? क्या शासक एवं अधिकारी वर्ग प्रजा के अधिकारों की रक्षा करता है? क्या हम सही अर्थों में देश को सुनहरे भविष्य की ओर ले जाने के लिए प्रयत्नशील हैं ? सही अर्थों में हम इस महान् प्रजातन्त्र देश के आदर्श नागरिक तभी बन सकेंगे, जब हम अपने राष्ट्र और समाज के प्रति अपने कर्तव्य को पहचान सकेंगे और अपने देश का गौरव बढ़ाने में अपना सब कुछ न्यौछावर कर देंगे।

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