Uniform Civil Code Essay in Hindi | समान नागरिक संहिता पर निबंध

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Uniform Civil Code Essay in Hindi – समान नागरिक संहिता पर निबंध

Uniform Civil Code Essay in Hindi
समान नागरिक संहिता पर निबंध – Essay on Uniform Civil Code in Hindi

Uniform Civil Code Essay in Hindi 350 Words

यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैं तो सभी धर्मों के शाश्त्रों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए – B.R.Ambedkar

परिचय

समान नागरिक संहिता का अर्थ है भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना चाहिए चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। समान नागरिक संहिता में शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक कानून लागू होगा। जिसका किसी धर्म से कोई ताल्लुक नहीं है।

मुख्य भाग

समान नागरिक संहिता का उल्लेख हमारे संविधान के “अनुच्छेद 44” में किया गया है। भारत में गोवा एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ समान नागरिक संहिता लागू है। यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने से हर मजहब के लिए एक जैसा कानून आ जाएगा। मुस्लिमों में तीन शादियां करने और पत्नी को महज तीन बार तलाक बोले देने से रिश्ता खत्म कर देने वाली परंपरा खत्म हो जाएगी। विभिन्न धर्मों के विभिन्न कानूनों से न्यायपालिका पर बोझ पड़ता है। यूनिफॉर्म सिविल कोड आ जाने से इस मुश्किल से निजात मिलेगी। हर भारतीय पर एक समान कानून लागू होने से वोट बैंक और ध्रुवीकरण की राजनीति पर लगाम लगेगी। समान नागरिक संहिता के बारे में संभावित गलतफहमी ने विभिन्न धर्मों, विशेष रूप से अल्पसंख्यकों के बीच एक भय पैदा किया है कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य उनके धार्मिक रीति-रिवाजों और मूल्यों के खिलाफ है। समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन से पहले, अधिकारियों को अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतना चाहिए। हमारे देश की व्यापक विविधता के कारण समान नागरिक संहिता का कार्यान्वयन एक बोझिल कार्य है।

“सभी धर्म की एक पुकार, एकता को करो साकार”

निष्कर्ष

मेरे विचार से एक आदर्श राज्य में नागरिक के अधिकारों की रक्षा के लिए समान नागरिक संहिता एक आदर्श उपाय होगा। बदलते परिस्थितियों के बीच सभी नागरिकों के मौलिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए धर्म की परवाह किए बगैर समान नागरिक संहिता को लागू किया जाना चाहिए, क्योंकि समान नागरिक संहिता द्वारा धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीय अखंडता को भी मजबूत किया जा सकता है।

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