Sukanya Samriddhi Yojana in Hindi | सुकन्या समृद्धि योजना पर निबंध

सुकन्या समृद्धि योजना पर निबंध ( Sukanya Samriddhi Yojana in Hindi Essay ) – कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 के बच्चों और विद्यार्थियों के लिए सुकन्या समृद्धि योजना पर निबंध हिंदी में।

Sukanya Samriddhi Yojana in Hindi

सुकन्या समृद्धि योजना पर निबंध

Sukanya Samriddhi Yojana in Hindi
Essay on Sukanya Samriddhi Yojana in Hindi

Essay on Sukanya Samriddhi Yojana in Hindi 350 Words

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना’ का शुभारंभ करते हुए सुकन्या समृद्धि खाता योजना की घोषणा की थी। सुकन्या समृद्धि खाता छोटी बचत योजना है। इस योजना का उद्देश्य लड़कियों को शिक्षित करने और उनका विवाह खर्च मुहैया कराकर उनके सुनहरे भविष्य का निर्माण करना है।

मुख्य भाग

बेटी को बोझ ना समझे और ना ही उसके जन्म पर निराश हों, क्योंकि बिना बेटी के परिवार का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। इसी संदेश के साथ देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत सुकन्या समृद्धि योजना को लांच किया। यह योजना बेटियों की पढ़ाई और उनकी शादी पर आने वाले खर्च को आसानी से पूरा करने के उद्देश्य से लांच की गई है।

सुकन्या समृद्धि योजना की विशेषताएँ

“सुकन्या समृद्धि खाता” किसी भी डाकघर अथवा अधिकृत बैंक शाखा में खुलवाया जा सकता है। बेटी के जन्म के समय या फिर 10 साल की उम्र तक यह खाता खुलवाया जा सकता है। खाता खुलवाने के समय कम से कम 1000 रूपए और एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपए जमा करवाने होते हैं। बेटी के 10 वर्ष की आयु पूर्ण करने से पहले खाते का संचालन अभिभावक ही करेंगे, लेकिन इसके पश्चात स्वयं खाताधारक बालिका भी खाते का संचालन अपने हाथ में ले सकेगी।

बेटी की उम्र 18 वर्ष होने पर आप जमा राशि का 50 प्रतिशत बेटी की शिक्षा अथवा शादी के लिए निकलवा सकते हैं। ऐसा इसलिए किया गया है कि अभिभावक बेटी की शादी 18 साल से पहले ना करें। खाते में जमा सम्पूर्ण राशि और ब्याज की रकम को खाते के 21 साल होने पर निकाली जा सकती है।

“लड़की को बचाओ, मानव जाति को बचाओ।”

निष्कर्ष

सुकन्या समृद्धि खाता भारत सरकार से एक और स्वागत कदम है। भारत सरकार के ईमानदार प्रयासों के बावजूद, भारत में लिंग अनुपात अभी भी एक गंभीर चिंता है और यह देश की पिछड़ेपन को दिखाता है। यह सराहनीय है कि भारत सरकार गर्ल चाइल्ड की ओर लोगों की मानसिकता को बदलने के लिए कदम उठा रही है। अगर हमें महिलाओं के लिए एक सुरक्षित स्थान बनाना है तो हमें लिंग असंतुलन को ठीक करना होगा।

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