रबीन्द्रनाथ टैगोर पर निबंध | Essay on Rabindranath Tagore in Hindi

Essay on Rabindranath Tagore in Hindi. रबीन्द्रनाथ टैगोर पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 के बच्चों और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए रबीन्द्रनाथ टैगोर पर निबंध हिंदी में।

Essay on Rabindranath Tagore in Hindi – रबीन्द्रनाथ टैगोर पर निबंध

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Essay on Rabindranath Tagore in Hindi 200 Words

रविन्द्रनाथ टैगोर, रविन्द्रनाथ ठाकुर के नाम से भी जाने जाते थे। वह गुरूदेव के नाम से भी अधिक प्रसिद्व थे। वह एक महान भारतीय कवि थे जिन्होने देश में कई प्रसिद्ध लेखन दिए और कालिदास के बाद वे ही महान कवि थे। आज वह एक महान कवि और सभी दुनिया के लेखक के रूप में प्रसिद्व है। उनका जन्म 7 मई 1861 को देवेन्द्रनाथ टैगोर (पिता) और शारदा देवी (माता) के घर में एक समृद्ध और सुसंस्कृत परिवार में हुआ था। वह एक चित्रकार, उपन्यासकार, गायक, निबंध लेखक और देश भक्त थे।

उनके उपन्यास और छोटी कहानियाँ उनकी बुद्वि, गहरा अनुभव और मानव चरित्र के बारे में समझाते है। वह कवि थे जिन्होने राष्ट्र को एक बहुत ही सुंदर राष्ट्रगान ‘जन गण मन” दिया। उन्हे “गीतांजलि” का अपना महान अंग्रेजी संस्करण लिखने में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वह इस सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले एशियाई और पहले भारतीय थे। वे 1902 में शांतिनिकेतन में विश्वभारती विश्वविधालय के संस्थापक थे। उनके महान लेखन अभी भी देश के लोगों को प्रेरित करते है।

Essay on Rabindranath Tagore in Hindi 300 Words

रवीन्द्रनाथ टैगोर को कई कारणों से जाना जाता है। वे पहले एशियाई हैं, जिन्हें नोबेल पुरस्कार मिला। वे अकेले कवि हैं, जिन्होंने दो देशों का राष्ट्रगान लिखा है। अपनी सुंदर और दिल को छू जाने वाली कविताओं के कारण उन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है। उनका जन्म बंगाल में कोलकाता के एक जाने-माने परिवार में 6 मई, 1861 को हुआ। उनके पिता का नाम देवेन्द्रनाथ टैगोर था, जबकि माँ का नाम शारदा देवी था। उनकी पढ़ाई-लिखाई घर पर ही हुई।

वैसे तो उनकी पढ़ाई बाँग्ला में हुई, लेकिन दोपहर के समय उन्हें खास तौर से अग्रेजी पढ़ाने एक शिक्षक आया करते थे। उन्हें बचपन में ही कविताएँ पढ़ने का शौक लग गया था और आठ साल के होते-होते तो वे खुद ही कविताएँ लिखने लगे थे। उनके पिता चाहते थे कि वे वकील बनें, इसलिए पढ़ाई के लिए उन्हें इंग्लैंड भेज दिया गया। वापस लौटने पर उनकी शादी मृणालिनी देवी से हो गई। उनके चार बच्चे हुए पर अल्प आयु में मृणालिनी देवी स्वर्ग सिधार गईं।

रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी पढ़ाई किसी स्कूल की बजाय घर पर की थी। इसलिए उन्हें हमेशा लगता था कि पढ़ाई हमेशा खुले में ही की जानी चाहिए। इसलिए उन्होंने 1901 में कोलकाता के पास शांतिनिकेतन आकर वहाँ पेडों, पक्षियों और एक बगीचे के बीच शांतिनिकेतन आश्रम बनाया। 5 विद्यार्थियों और 5 शिक्षकों के साथ शुरू किए शांतिनिकेतन में आज भी देश-विदेश से छात्र-छात्राएँ आकर पढ़ते हैं।

रवीन्द्रनाथ टैगोर को खास तौर से उनकी कविताओं के लिए जाना जाता है, लेकिन उन्होंने नाटक, गीत, कहानियाँ सभी कुछ लिखा। उन्होंने करीब 2,230 गीत लिखे। हमारा राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और बाँग्लादेश का राष्ट्रगानु ‘आमार सोनार बाँगला’ उन्होंने ही लिखा था।

इसके अलावा उनकी मुख्य रचनाएँ गीतांजलि, मानसी, चित्रा, सोनार तारी, क्षणिका आदि हैं। उन्होंने कुछ किताबों का अंग्रेजी में अनुवाद भी किया। 1913 में उन्हें उनकी रचना ‘गीतांजलि’ के लिए नोबेल पुरस्कार मिला। वे एक अच्छे चित्रकार भी थे। 1941 में उनकी मृत्यु हो गई, लेकिन वे लोगों के दिलों में आज भी जिंदा हैं।

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